• Latest
  • Trending
  • All
  • Hanuman
  • Shiv
  • Radha Krishna
  • Khatu Shyam
  • Sawariya Seth
  • Mata
Omkareshwar Jyotirlinga

Omkareshwar Jyotirlinga ओंकारेश्वर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इतिहास: 2 अद्भुत धामों के अनसुने रहस्य (Best Guide)

June 16, 2026
SARASWATHI DEVI

7 शक्तिशाली रहस्य: SARASWATHI DEVI का प्राचीन इतिहास और ज्ञान की महिमा : 2026

June 24, 2026
PURUHUTIKA DEVI

5 चमत्कारी रहस्य: PURUHUTIKA DEVI का गौरवशाली इतिहास और शक्ति पीठ की महिमा : 2026

June 24, 2026
MANIKYAMBA DEVI

MANIKYAMBA DEVI: 5 अद्भुत और पवित्र रहस्य जो आपकी आस्था को मजबूत करेंगे! 2026

June 24, 2026
Mahalakshmi Devi

10 अद्भुत रहस्य: Mahalakshmi Devi का संपूर्ण इतिहास और चमत्कारी कथाएं : 2026

June 24, 2026
Kamakshi Devi

Kamakshi Devi : कामाक्षी देवी का रहस्यमयी इतिहास: 5 अद्भुत तथ्य जो आपको हैरान कर देंगे : 2026

June 23, 2026
YOGAMBA DEVI का अद्भुत इतिहास: 7 चमत्कारी रहस्य जो आपको हैरान कर देंगे : 2026

YOGAMBA DEVI का अद्भुत इतिहास: 7 चमत्कारी रहस्य जो आपको हैरान कर देंगे : 2026

June 22, 2026
EKAVEERIKA DEVI

Ekaveerika Devi :एकवीरिका देवी का इतिहास: 7 अद्भुत रहस्य और चमत्कारी गाथाएं जो आपको हैरान कर देंगी : 2026

June 22, 2026
BIRAJA GIRIJA DEVI

7 रहस्य: BIRAJA GIRIJA DEVI MAHA SHAKTI PEETHA का अद्भुत इतिहास और दर्शन : 2026

June 22, 2026
Bhramaramba Devi

अद्भुत Bhramaramba Devi का इतिहास: 7 रहस्यमयी और शक्तिशाली तथ्य : 2026

June 22, 2026
GIRIJA DEVI

ठुमरी की रानी: Girija Devi का अनसुना और शक्तिशाली इतिहास (7 रोचक तथ्य): 2026

June 22, 2026
BHRAMARA MBA DEVI

Bhramara MBA Devi Ka Itihaas: 7 अद्भुत रहस्य जो बदल देंगे आपका करियर: 2026

June 21, 2026
Manikarni

मणिकर्णिका का अद्भुत इतिहास: Manikarni की 5 अनसुनी कहानियां जो आपको हैरान कर देंगी: 2026

June 21, 2026
divyasur.com
  • GANESH
  • Hanuman
  • Mata
  • Shiv
  • Radha Krishna
  • Khatu Shyam
  • Sawariya Seth
  • Siya Ram
No Result
View All Result
divyasur.com
No Result
View All Result
Home Shiv

Omkareshwar Jyotirlinga ओंकारेश्वर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इतिहास: 2 अद्भुत धामों के अनसुने रहस्य (Best Guide)

ओंकारेश्वर महाकालेश्वर का प्राचीन इतिहास, पौराणिक कथाएं और रहस्य। जानिए क्यों ये दो ज्योतिर्लिंग शिव भक्तों के लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं।

by Divya Sur
June 16, 2026
in Shiv
242 10
0
Omkareshwar Jyotirlinga
Share on FacebookShare on Twitter

ओंकारेश्वर महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग इतिहास: 2 चमत्कारी धाम जिनकी कहानी आपको हैरान कर देगी!

भारत भूमि देवताओं और तीर्थों की भूमि है। यहाँ हर कण में भगवान शिव का वास माना जाता है। लेकिन जब बात महादेव के सबसे जाग्रत और पवित्र स्वरूपों की आती है, तो 12 ज्योतिर्लिंगों का नाम सबसे ऊपर आता है। इन 12 ज्योतिर्लिंगों में से दो अत्यंत महत्वपूर्ण और चमत्कारी ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश की पावन धरती पर विराजमान हैं – Omkareshwar Mahakaleshwar।

आज के इस विस्तृत लेख में, हम ओंकारेश्वर महाकालेश्वर के उस प्राचीन और हैरान कर देने वाले इतिहास (Omkareshwar Mahakaleshwar History in Hindi) की गहराइयों में उतरेंगे, जो हर शिव भक्त को एक बार जरूर जानना चाहिए। यह सिर्फ पत्थरों के मंदिरों की कहानी नहीं है, बल्कि यह कहानी है भक्ति की, तपस्या की, और स्वयं कालों के काल महाकाल के धरती फाड़कर प्रकट होने की!

तो चलिए, शिव के इन दो महान स्वरूपों की दिव्य यात्रा पर चलते हैं। हर-हर महादेव!

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास और रहस्य (History of Omkareshwar Jyotirlinga)

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में, पुण्य सलिला माँ नर्मदा नदी के तट पर स्थित है पवित्र ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग। यह 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा ज्योतिर्लिंग माना जाता है। सबसे बड़ी और अद्भुत बात यह है कि जिस मान्धाता द्वीप (या शिवपुरी द्वीप) पर यह मंदिर स्थित है, उस द्वीप का आकार स्वयं प्राकृतिक रूप से हिन्दू धर्म के पवित्र अक्षर “ॐ” (Om) के समान है।

नर्मदा नदी यहाँ दो धाराओं में बंट जाती है, और बीच में जो टापू बनता है, वही ओंकारेश्वर का पावन धाम है।

Omkareshwar Jyotirlinga

ओंकारेश्वर और ममलेश्वर: एक ही ज्योतिर्लिंग के दो स्वरूप

कई लोगों को यह जानकर हैरानी होती है कि ओंकारेश्वर में असल में दो ज्योतिर्लिंग पूजे जाते हैं – पहला ओंकारेश्वर और दूसरा ममलेश्वर (या अमलेश्वर)।

पुराणों के अनुसार, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को एक ही माना जाता है, लेकिन यह दो स्वरूपों में विभक्त है। नर्मदा के उत्तरी तट पर (द्वीप पर) ओंकारेश्वर विराजमान हैं, और दक्षिणी तट पर ममलेश्वर महादेव। मान्यता है कि ओंकारेश्वर की तीर्थयात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती, जब तक भक्त दोनों मंदिरों के दर्शन न कर लें।

ओंकारेश्वर की पौराणिक कथाएँ (Omkareshwar Jyotirlinga Stories)

ओंकारेश्वर महाकालेश्वर की महिमा केवल उनके अस्तित्व से नहीं, बल्कि उनसे जुड़ी पौराणिक कथाओं से है। ओंकारेश्वर मंदिर से मुख्य रूप से तीन प्रमुख कथाएँ जुड़ी हुई हैं:

1. विंध्य पर्वत की तपस्या

शिव पुराण की कोटि रुद्र संहिता के अनुसार, एक बार नारद मुनि विंध्य पर्वत पर आए। विंध्याचल को अपने विशाल आकार और वैभव पर बड़ा घमंड था। नारद जी ने उसका घमंड तोड़ने के लिए कहा, “हे विंध्य! तुम भले ही कितने भी विशाल हो, लेकिन सुमेरु पर्वत तुमसे बहुत ऊँचा है, यहाँ तक कि उसका शिखर स्वर्ग लोक तक पहुँचता है।”

यह सुनकर विंध्याचल बहुत दुखी और लज्जित हुआ। उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने का निश्चय किया। वह नर्मदा नदी के तट पर गया और वहाँ उसने लगातार छह महीने तक शिवलिंग की स्थापना कर कठोर तपस्या की।

विंध्य की इस घोर तपस्या से महादेव अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने उसे दर्शन दिए। शिवजी ने विंध्याचल को मनचाहा वरदान दिया। जब शिवजी वहाँ प्रकट हुए, तो देवताओं और ऋषियों ने भी उनसे प्रार्थना की कि वे हमेशा के लिए इस स्थान पर निवास करें। उनकी प्रार्थना सुनकर भगवान शिव ने उस शिवलिंग के दो भाग कर दिए। एक भाग ‘ओंकारेश्वर’ कहलाया और दूसरा ‘ममलेश्वर’ या ‘अमलेश्वर’ के रूप में जाना गया।

2. राजा मान्धाता की भक्ति

एक अन्य कथा के अनुसार, प्राचीन काल में इक्ष्वाकु वंश में राजा मान्धाता नाम के एक महान और प्रतापी राजा हुए। वे भगवान शिव के परम भक्त थे। उन्होंने नर्मदा नदी के इसी तट पर (जिसे आज मान्धाता पर्वत कहा जाता है) घोर तपस्या की थी।

उन्होंने अन्न-जल त्याग कर शिवजी का ध्यान किया। उनकी कठोर भक्ति देखकर भगवान शिव प्रसन्न हुए और प्रकट होकर बोले, “हे राजन! मैं यहाँ सदा के लिए ‘ओंकार’ रूप में वास करूँगा।” तभी से इस स्थान को ओंकारेश्वर कहा जाने लगा। आज भी यह पर्वत राजा मान्धाता के नाम पर ही जाना जाता है।

3. शिव-पार्वती का चौसर खेलना: एक अनसुलझा रहस्य

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ा एक ऐसा रहस्य है, जो आज भी विज्ञान और तर्क से परे है। मान्यता है कि आज भी, हर रात भगवान शिव और माता पार्वती यहाँ चौपड़ (चौसर) खेलने आते हैं।

मंदिर के पुजारियों के अनुसार, रात को शयन आरती के बाद गर्भगृह में एक चौपड़ और पासे बिछा दिए जाते हैं। दरवाजे बाहर से बंद कर दिए जाते हैं। लेकिन अगली सुबह जब कपाट खोले जाते हैं, तो पासे उल्टे-पुल्टे मिलते हैं, जैसे रात में किसी ने उन्हें खेला हो! यह चमत्कार ओंकारेश्वर के दर्शन को और भी रहस्यमयी बना देता है।

Omkareshwar Jyotirlinga

ओंकारेश्वर मंदिर की वास्तुकला (Architecture of Omkareshwar)

ओंकारेश्वर का मुख्य मंदिर उत्तर भारतीय शैली (नागर शैली) में बना हुआ है। यह एक पांच मंजिला भव्य इमारत है। इसकी वास्तुकला बहुत ही जटिल और सुंदर है।

  • सबसे नीची मंजिल पर: श्री ओंकारेश्वर महादेव विराजमान हैं।
  • दूसरी मंजिल पर: श्री महाकालेश्वर।
  • तीसरी मंजिल पर: श्री सिद्धनाथ।
  • चौथी मंजिल पर: श्री गुप्तेश्वर।
  • पांचवी मंजिल पर: ध्वजाधारी देवता स्थापित हैं।

मंदिर के खंभों पर सुंदर नक्काशी की गई है, जो इसे कला का एक उत्कृष्ट नमूना बनाती है।

Omkareshwar Jyotirlinga

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का इतिहास और महिमा (History of Mahakaleshwar Jyotirlinga)

अब बात करते हैं ओंकारेश्वर महाकालेश्वर की इस यात्रा में दूसरे सबसे शक्तिशाली धाम की – श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग।

मध्य प्रदेश की धार्मिक राजधानी कहे जाने वाले पवित्र शहर उज्जैन (प्राचीन अवंतिका) में क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित है महाकाल का यह भव्य मंदिर। 12 ज्योतिर्लिंगों में महाकालेश्वर का स्थान बहुत ही विशिष्ट है। यह एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जो ‘दक्षिणमुखी’ है (जिसका मुख दक्षिण दिशा की ओर है)। तंत्र शास्त्र और वेदों में दक्षिण दिशा को यम (मृत्यु के देवता) की दिशा माना जाता है। इसलिए, दक्षिणमुखी होने के कारण महाकालेश्वर को मृत्यु पर विजय प्राप्त करने वाला, यानी ‘कालों का काल महाकाल’ कहा जाता है।

“Ujjain Mahakal का इतिहास, रहस्य और भस्म आरती की पूरी जानकारी। जानें कैसे 500 सालों तक कुएं में छिपा था ज्योतिर्लिंग और क्या है महाकाल लोक का अद्भुत रहस्य।”2026

महाकाल के धरती चीरकर प्रकट होने की कथा

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना की कथा शिव पुराण में बहुत ही विस्तार से बताई गई है, जो रोंगटे खड़े कर देने वाली है।

कथा के अनुसार, प्राचीन काल में अवंतिका (उज्जैन) एक बहुत ही रमणीय नगरी थी, जहाँ धर्म और कर्म का पालन होता था। इसी नगर में वेदप्रिय नाम के एक बहुत ही ज्ञानी और तपस्वी ब्राह्मण रहते थे। वेदप्रिय भगवान शिव के अनन्य भक्त थे और प्रतिदिन पार्थिव शिवलिंग (मिट्टी का शिवलिंग) बनाकर उनकी पूजा-आराधना करते थे।

उसी समय, पास के रत्नमाल पर्वत पर ‘दूषण’ नाम का एक भयानक राक्षस रहता था। दूषण को ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था, जिसके अहंकार में वह अंधा हो चुका था। उसने ऋषियों, मुनियों और धर्म का पालन करने वालों पर भयंकर अत्याचार शुरू कर दिए।

एक दिन दूषण की नजर अवंतिका नगरी पर पड़ी। उसने देखा कि यहाँ के ब्राह्मण निडर होकर शिव की पूजा कर रहे हैं। उसने अपनी विशाल राक्षस सेना के साथ अवंतिका पर हमला कर दिया। उसने ब्राह्मणों को पूजा रोकने की चेतावनी दी, लेकिन वेदप्रिय और अन्य ब्राह्मणों ने उसकी परवाह नहीं की और महाकाल की साधना में लीन रहे।

जब दूषण ने ब्राह्मणों को मारने के लिए अपने हथियार उठाए, तो ब्राह्मणों की रक्षा की पुकार सुनकर स्वयं कालों के काल भगवान शिव अत्यंत क्रोधित हो उठे।

अचानक एक भयंकर गर्जना हुई। जिस स्थान पर वेदप्रिय मिट्टी के शिवलिंग की पूजा कर रहे थे, वहीं धरती फट गई! एक विशाल गड्ढा बन गया और धरती को चीरते हुए भगवान शिव अपने सबसे रौद्र और भयंकर ‘महाकाल’ स्वरूप में प्रकट हुए।

महाकाल के हुंकार मात्र से ही दूषण और उसकी पूरी सेना भस्म हो गई। भगवान शिव ने उस भस्म (राख) को अपने शरीर पर धारण किया (यही कारण है कि आज भी महाकाल की भस्म आरती विश्व प्रसिद्ध है)।

राक्षस के वध के बाद, ब्राह्मणों ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे अपनी प्रजा की रक्षा के लिए हमेशा के लिए इसी स्थान पर विराजमान हो जाएं। अपने भक्तों की पुकार सुनकर भगवान शिव महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में उसी गड्ढे में स्थापित हो गए।

Omkareshwar Jyotirlinga

महाकालेश्वर मंदिर का इतिहास: मुगलों का आक्रमण और 500 साल का संघर्ष

ओंकारेश्वर महाकालेश्वर का इतिहास केवल पौराणिक कथाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के इतिहास के उतार-चढ़ाव का भी गवाह है। महाकाल मंदिर का आधुनिक इतिहास दर्द और फिर से उठ खड़े होने की कहानी बयां करता है।

इतिहासकारों के अनुसार, 1235 ईस्वी में दिल्ली के सुल्तान इल्तुतमिश ने उज्जैन पर भयानक आक्रमण किया था। उसने महाकालेश्वर मंदिर को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था और मंदिर की संपत्ति लूट ली थी।

लेकिन शिव भक्तों की आस्था को कोई आक्रांता नष्ट नहीं कर सका। जब मंदिर पर हमला हुआ, तो पुजारियों और स्थानीय लोगों ने मुख्य ज्योतिर्लिंग को बचाने के लिए उसे मंदिर के पास ही बने एक कुएं (जिसे आज कोटितीर्थ कुंड कहा जाता है) में छिपा दिया था।

आश्चर्य की बात यह है कि यह स्वयंभू ज्योतिर्लिंग लगभग 500 वर्षों से भी अधिक समय तक उस कुएं में सुरक्षित रखा रहा। आक्रांताओं ने मंदिर के अवशेषों पर कब्जा कर लिया, लेकिन महाकाल अपने भक्तों के दिलों में जीवित रहे।

अंततः, 18वीं शताब्दी (लगभग 1732-34 ईस्वी) में, जब मराठा साम्राज्य का विस्तार हुआ, तब मराठा सेनापति राणोजी राव शिंदे (सिंधिया वंश के संस्थापक) ने उज्जैन पर अधिकार किया। उन्होंने ही कुएं से ज्योतिर्लिंग को निकालकर फिर से उसकी प्राण-प्रतिष्ठा करवाई और आज जो हम भव्य महाकालेश्वर मंदिर देखते हैं, उसका पुनर्निर्माण राणोजी शिंदे ने ही करवाया था।

12 ज्योतिर्लिंगों में सर्वोच्च: Kedarnath Itihas का अद्भुत और संपूर्ण रहस्य 2026

श्री महाकालेश्वर की विशेषताएं जो इन्हें अद्वितीय बनाती हैं

  1. भस्म आरती: महाकालेश्वर दुनिया का एकमात्र ऐसा शिव मंदिर है जहाँ तड़के सुबह 4 बजे ‘भस्म आरती’ होती है। प्राचीन काल में यह आरती श्मशान से लाई गई ताजी चिता की राख से होती थी। हालांकि, अब गाय के गोबर के कंडों (उपले) और कुछ विशेष लकड़ियों की भस्म का उपयोग होता है। यह आरती देखने के लिए दुनिया भर से लोग आते हैं।
  2. दक्षिणमुखी शिवलिंग: जैसा कि पहले बताया गया है, यह इकलौता दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग है।
  3. भगवान श्री महाकाल ही उज्जैन के राजा हैं: एक बहुत ही रोचक मान्यता है कि महाकाल ही उज्जैन के असली राजा हैं। इसलिए, कोई भी मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या राजा रात में उज्जैन शहर में नहीं रुक सकता। अगर कोई रुकता है, तो माना जाता है कि उसकी सत्ता चली जाती है या कोई अनहोनी होती है।
  4. नागचंद्रेश्वर मंदिर: महाकाल मंदिर के तीसरे तल पर नागचंद्रेश्वर महादेव का मंदिर है। इस मंदिर की खासियत यह है कि इसके कपाट साल में केवल एक बार, नाग पंचमी के दिन, 24 घंटे के लिए खुलते हैं।

Omkareshwar Jyotirlinga

ओंकारेश्वर महाकालेश्वर यात्रा: कैसे करें दर्शन? (How to plan Omkareshwar Mahakaleshwar Trip)

अगर आप ओंकारेश्वर महाकालेश्वर के दर्शन की योजना बना रहे हैं, तो मध्य प्रदेश आना आपके लिए एक बहुत ही आध्यात्मिक अनुभव होगा।

ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर के बीच की दूरी:

उज्जैन (महाकालेश्वर) से ओंकारेश्वर की दूरी लगभग 140 किलोमीटर है। सड़क मार्ग से यह सफर तय करने में करीब 3 से 4 घंटे का समय लगता है। ज्यादातर भक्त पहले उज्जैन में महाकाल के दर्शन करते हैं और फिर कैब या बस बुक करके ओंकारेश्वर जाते हैं।

महाकालेश्वर कैसे पहुंचें?

  • हवाई मार्ग (Flight): सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर का देवी अहिल्याबाई होल्कर एयरपोर्ट (Indore Airport) है, जो उज्जैन से करीब 55 किमी दूर है।
  • रेल मार्ग (Train): उज्जैन जंक्शन (UJN) भारत के प्रमुख शहरों (दिल्ली, मुंबई, भोपाल आदि) से सीधे जुड़ा हुआ है।
  • सड़क मार्ग (Road): उज्जैन के लिए इंदौर, भोपाल, और अन्य शहरों से बेहतरीन बस सेवाएं उपलब्ध हैं।

ओंकारेश्वर कैसे पहुंचें?

  • हवाई मार्ग (Flight): ओंकारेश्वर के लिए भी सबसे नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर ही है (करीब 80 किमी)।
  • रेल मार्ग (Train): ओंकारेश्वर रोड (Omkareshwar Road) एक छोटा रेलवे स्टेशन है, लेकिन सबसे सुविधाजनक खण्डवा जंक्शन (Khandwa) है जो ओंकारेश्वर से करीब 70 किमी दूर है।
  • सड़क मार्ग (Road): उज्जैन या इंदौर से सीधे बस या टैक्सी लेकर आप ओंकारेश्वर आसानी से पहुँच सकते हैं।

निष्कर्ष: शिव के इन दो रूपों की महिमा अनंत है

ओंकारेश्वर महाकालेश्वर का इतिहास सिर्फ अतीत के पन्ने नहीं हैं; ये आज भी लाखों लोगों की आस्था का धड़कता हुआ केंद्र हैं। जहाँ ओंकारेश्वर में नर्मदा की कल-कल ध्वनि के बीच शिव के शांत ‘ॐ’ स्वरूप के दर्शन होते हैं, वहीं उज्जैन में महाकाल की भस्म आरती मृत्यु के भय को मिटाकर जीवन की सच्चाई का बोध कराती है।

500 सालों तक कुएं में रहने के बाद भी महाकाल का तेज कम नहीं हुआ, और सदियों से ओंकारेश्वर में शिव-पार्वती का चौपड़ खेलना आज भी एक दिव्य रहस्य बना हुआ है।

अगर आपने अभी तक इन दोनों ज्योतिर्लिंगों के दर्शन नहीं किए हैं, तो अपने जीवन में एक बार ओंकारेश्वर महाकालेश्वर की इस पावन यात्रा पर जरूर जाएं। यकीन मानिए, वहाँ की ऊर्जा आपके जीवन को सकारात्मकता से भर देगी।

आपको यह जानकारी कैसी लगी? अगर आपके मन में भगवान महाकाल या ओंकारेश्वर से जुड़ा कोई सवाल है, तो नीचे कमेंट करके जरूर पूछें। इस पोस्ट को अपने परिवार और दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें! ॐ नमः शिवाय!

https://youtu.be/jPgcdXjmszY

Divya Sur

Tags: उज्जैन दर्शनओंकारेश्वरओंकारेश्वर मंदिरज्योतिर्लिंगमध्य प्रदेश पर्यटनमहाकाल का इतिहासमहाकालेश्वरशिव कथासावन 2026हिन्दू धर्म
Divya Sur

Divya Sur

Pages

  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • About
  • Privacy & Policy
  • Contact
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions

© 2026 Divya Sur. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Hanuman
  • Mata
  • Shiv
  • Radha Krishna
  • Radha Krishna
  • Khatu Shyam
  • Sawariya Seth

© 2026 Divya Sur. All Rights Reserved.