• Latest
  • Trending
  • All
  • Hanuman
  • Shiv
  • Radha Krishna
  • Khatu Shyam
  • Sawariya Seth
  • Mata
Lord Kartikeya

“Surprising History of Lord Kartikeya: 7 अद्भुत रहस्य जो आपको हैरान कर देंगे” 2026

June 18, 2026
SARASWATHI DEVI

7 शक्तिशाली रहस्य: SARASWATHI DEVI का प्राचीन इतिहास और ज्ञान की महिमा : 2026

June 24, 2026
PURUHUTIKA DEVI

5 चमत्कारी रहस्य: PURUHUTIKA DEVI का गौरवशाली इतिहास और शक्ति पीठ की महिमा : 2026

June 24, 2026
MANIKYAMBA DEVI

MANIKYAMBA DEVI: 5 अद्भुत और पवित्र रहस्य जो आपकी आस्था को मजबूत करेंगे! 2026

June 24, 2026
Mahalakshmi Devi

10 अद्भुत रहस्य: Mahalakshmi Devi का संपूर्ण इतिहास और चमत्कारी कथाएं : 2026

June 24, 2026
Kamakshi Devi

Kamakshi Devi : कामाक्षी देवी का रहस्यमयी इतिहास: 5 अद्भुत तथ्य जो आपको हैरान कर देंगे : 2026

June 23, 2026
YOGAMBA DEVI का अद्भुत इतिहास: 7 चमत्कारी रहस्य जो आपको हैरान कर देंगे : 2026

YOGAMBA DEVI का अद्भुत इतिहास: 7 चमत्कारी रहस्य जो आपको हैरान कर देंगे : 2026

June 22, 2026
EKAVEERIKA DEVI

Ekaveerika Devi :एकवीरिका देवी का इतिहास: 7 अद्भुत रहस्य और चमत्कारी गाथाएं जो आपको हैरान कर देंगी : 2026

June 22, 2026
BIRAJA GIRIJA DEVI

7 रहस्य: BIRAJA GIRIJA DEVI MAHA SHAKTI PEETHA का अद्भुत इतिहास और दर्शन : 2026

June 22, 2026
Bhramaramba Devi

अद्भुत Bhramaramba Devi का इतिहास: 7 रहस्यमयी और शक्तिशाली तथ्य : 2026

June 22, 2026
GIRIJA DEVI

ठुमरी की रानी: Girija Devi का अनसुना और शक्तिशाली इतिहास (7 रोचक तथ्य): 2026

June 22, 2026
BHRAMARA MBA DEVI

Bhramara MBA Devi Ka Itihaas: 7 अद्भुत रहस्य जो बदल देंगे आपका करियर: 2026

June 21, 2026
Manikarni

मणिकर्णिका का अद्भुत इतिहास: Manikarni की 5 अनसुनी कहानियां जो आपको हैरान कर देंगी: 2026

June 21, 2026
divyasur.com
  • GANESH
  • Hanuman
  • Mata
  • Shiv
  • Radha Krishna
  • Khatu Shyam
  • Sawariya Seth
  • Siya Ram
No Result
View All Result
divyasur.com
No Result
View All Result
Home KARTIKEYA

“Surprising History of Lord Kartikeya: 7 अद्भुत रहस्य जो आपको हैरान कर देंगे” 2026

"क्या आप Lord Kartikeya History के पीछे का असली रहस्य जानना चाहते हैं? जानिए भगवान कार्तिकेय का जन्म, उनके 6 मुखों का राज और दक्षिण भारत में उनकी महिमा की पूरी कहानी।"

by Divya Sur
June 18, 2026
in KARTIKEYA
240 12
0
Lord Kartikeya
Share on FacebookShare on Twitter

Surprising History of Lord Kartikeya: 7 अद्भुत रहस्य जो आपको हैरान कर देंगे

हिन्दू धर्म में भगवान शिव और माता पार्वती के परिवार का विशेष महत्व है। हम सभी प्रथम पूज्य भगवान गणेश के बारे में तो बहुत कुछ जानते हैं, लेकिन क्या आप शिव जी के बड़े पुत्र, देव सेनापति और दक्षिण भारत के प्रमुख देवता Lord Kartikeya History के बारे में विस्तार से जानते हैं?

आज हम इस ब्लॉग पोस्ट में उस शूरवीर देवता की कहानी लेकर आए हैं, जिन्होंने देवताओं को असुरों के आतंक से मुक्ति दिलाई थी। भगवान कार्तिकेय, जिन्हें मुरुगन, स्कंद, कुमार और सुब्रमण्यम के नाम से भी जाना जाता है, का इतिहास वीरता, त्याग और ज्ञान से भरा हुआ है।

क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों भगवान कार्तिकेय अपने माता-पिता को छोड़कर दक्षिण भारत चले गए थे? या फिर उनका जन्म एक अत्यंत ही विचित्र तरीके से क्यों हुआ था? अगर आप इन सभी सवालों के जवाब ढूंढ रहे हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए ही है। आइए, Lord Kartikeya History के इन अनसुलझे और रोचक पन्नों को पलटते हैं और जानते हैं उनके जीवन के 7 अद्भुत रहस्य।

Lord Kartikeya

 

1. भगवान कार्तिकेय का रहस्यमयी जन्म (Birth Story of Lord Kartikeya)

Lord Kartikeya History की शुरुआत उनके बेहद ही चमत्कारिक और रहस्यमयी जन्म से होती है। शिव पुराण और स्कंद पुराण में उनके जन्म की कथा विस्तार से मिलती है, जो सीधे तौर पर तारकासुर नामक एक भयंकर राक्षस के अंत से जुड़ी है।

तारकासुर का आतंक और वरदान

प्राचीन काल में तारकासुर नाम के एक शक्तिशाली असुर ने कठोर तपस्या करके ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर लिया था। उसने ब्रह्मा जी से अमरता का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा जी ने कहा कि मृत्यु लोक में जो जन्मा है, उसकी मृत्यु निश्चित है। तब तारकासुर ने चालाकी से वरदान मांगा कि उसकी मृत्यु केवल भगवान शिव के पुत्र के हाथों ही हो।

उसे विश्वास था कि सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव वैरागी हो चुके हैं और वे कभी दूसरा विवाह नहीं करेंगे। ऐसे में शिव जी का पुत्र कभी होगा ही नहीं और वह अमर रहेगा। वरदान पाते ही तारकासुर ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया। उसने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया और देवताओं को दर-दर भटकने पर मजबूर कर दिया।

शिव-पार्वती विवाह और दिव्य तेज का प्राकट्य

हताश होकर सभी देवता भगवान विष्णु के पास गए। विष्णु जी ने उपाय बताया कि माता सती ने ही हिमालय राज के घर पार्वती के रूप में जन्म लिया है। यदि शिव जी का विवाह पार्वती जी से हो जाए, तो उनकी संतान तारकासुर का वध कर सकती है।

देवताओं के अनेक प्रयासों, कामदेव के भस्म होने और माता पार्वती की कठोर तपस्या के बाद अंततः शिव और पार्वती का विवाह संपन्न हुआ। विवाह के पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती एकांत में गए। उनके मिलन से जो अत्यंत प्रज्वलित और दिव्य तेज (अग्नि) उत्पन्न हुआ, वह इतना शक्तिशाली था कि उसे स्वयं अग्निदेव भी सहन नहीं कर पाए।

6 कृतिकाओं द्वारा पालन-पोषण

अग्निदेव ने उस दिव्य तेज को गंगा नदी में प्रवाहित कर दिया। गंगा की शीतलता भी उस तेज को शांत नहीं कर पाई और उसने उस तेज को सरकंडों के एक जंगल (शरवण) में छोड़ दिया। वहाँ उस दिव्य तेज ने छह अलग-अलग बालकों का रूप ले लिया।

उसी समय आकाशगंगा की छह कृतिकाएं (तारे) वहाँ से गुजरीं। उन सुंदर बालकों को देखकर उनके मन में मातृत्व जाग उठा और वे उन बालकों को दूध पिलाने लगीं। माता पार्वती जब वहाँ पहुंचीं, तो उन्होंने उन छह बालकों को गले लगा लिया और वे छहों बालक मिलकर एक शरीर बन गए, लेकिन उनके छह मुख ही रहे।

चूंकि कृतिकाओं ने उनका पालन-पोषण किया था, इसलिए उनका नाम ‘कार्तिकेय’ पड़ा। शरवण (सरकंडों के वन) में जन्म लेने के कारण उन्हें ‘शरवणभव’ भी कहा गया। यह Lord Kartikeya History का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव था।

Lord Kartikeya

2. देवों के सेनापति और तारकासुर का वध

जैसे ही कार्तिकेय युवा हुए, देवताओं को अपनी मुक्ति की किरण दिखाई दी। Lord Kartikeya History में उनका सबसे प्रमुख कार्य एक सेनापति के रूप में उनके नेतृत्व को दर्शाता है।

माता पार्वती ने उन्हें एक अजेय अस्त्र ‘वेल’ (भाला) प्रदान किया, जो ज्ञान और शक्ति का प्रतीक है। भगवान शिव ने उन्हें युद्ध कौशल का ज्ञान दिया। देवताओं ने उन्हें अपनी सेना का ‘सेनापति’ (कमांडर-इन-चीफ) नियुक्त किया।

बालक कार्तिकेय ने भयंकर युद्ध में तारकासुर का सामना किया। अपनी अपार शक्ति और माता-पिता के आशीर्वाद से उन्होंने तारकासुर और उसके भाइयों (शूरपद्मन और सिंहामुखन) का वध कर दिया और तीनों लोकों को असुरों के अत्याचार से मुक्त कराया। इसी पराक्रम के कारण उन्हें ‘स्कंद’ और ‘कुमार’ भी कहा गया।

3. कार्तिकेय और गणेश की प्रसिद्ध प्रतियोगिता

जब हम Lord Kartikeya History की बात करते हैं, तो उनके और भगवान गणेश के बीच हुई पृथ्वी की परिक्रमा वाली कथा का जिक्र जरूर आता है। यह कथा न केवल रोचक है, बल्कि जीवन के एक बड़े दर्शन को भी समझाती है।

एक बार शिव जी और माता पार्वती के पास एक दिव्य फल आया, जिसे ‘ज्ञान फल’ कहा जाता था। दोनों पुत्रों (कार्तिकेय और गणेश) में से यह फल किसे दिया जाए, इस पर प्रतियोगिता रखी गई। शिव जी ने कहा कि जो भी ब्रह्मांड की तीन बार परिक्रमा करके सबसे पहले वापस आएगा, उसे यह फल मिलेगा।

कार्तिकेय का प्रस्थान: यह सुनते ही कार्तिकेय तुरंत अपने वाहन मोर (मयूर) पर बैठे और तेजी से ब्रह्मांड की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। उन्हें अपनी गति और शक्ति पर पूरा विश्वास था।

गणेश जी की बुद्धिमानी: दूसरी ओर, गणेश जी का वाहन मूषक (चूहा) था और उनका शरीर भारी था। उन्होंने अपनी बुद्धि का प्रयोग किया। गणेश जी ने अपने माता-पिता (शिव और पार्वती) की ही तीन परिक्रमा कर लीं और कहा, “मेरे लिए तो मेरे माता-पिता ही पूरा ब्रह्मांड हैं।”

शिव-पार्वती गणेश जी की इस बुद्धिमत्ता से अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने वह दिव्य फल गणेश जी को दे दिया। साथ ही उन्हें ‘प्रथम पूज्य’ होने का वरदान भी दिया।

Lord Kartikeya

4. दक्षिण भारत की यात्रा: कैसे बने ‘मुरुगन स्वामी’

Lord Kartikeya History का सबसे भावुक क्षण तब आता है जब वे परिक्रमा से वापस लौटते हैं। जब कार्तिकेय ब्रह्मांड की परिक्रमा करके कैलाश लौटे, तो उन्होंने देखा कि फल गणेश को मिल चुका है और उन्हें प्रथम पूज्य भी घोषित कर दिया गया है।

कार्तिकेय को यह देखकर अत्यंत निराशा और क्रोध आया। उन्हें लगा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने अपने सभी राजसी वस्त्र और आभूषण त्याग दिए। उन्होंने वैराग्य धारण कर लिया और एक संन्यासी का रूप लेकर कैलाश से निकल पड़े।

वे उत्तर भारत से दक्षिण भारत की ओर चले गए और ‘क्रौंच पर्वत’ पर जाकर निवास करने लगे। शिव जी और माता पार्वती ने उन्हें बहुत मनाने का प्रयास किया, लेकिन कार्तिकेय ने अपना निश्चय नहीं बदला।

यही कारण है कि दक्षिण भारत में Lord Kartikeya History और उनकी महिमा उत्तर भारत की तुलना में कहीं अधिक है। दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में, उन्हें ‘मुरुगन स्वामी’ के नाम से जाना जाता है और वे वहाँ के सर्वोपरि देवता माने जाते हैं। तमिल संस्कृति में मुरुगन को तमिल भाषा और साहित्य का संरक्षक भी माना जाता है।

Lord Shiva”भगवान शिव का इतिहास और रहस्य: महादेव के जन्म से लेकर महाकाल तक की पूरी कहानी”2026

5. भगवान कार्तिकेय के 6 मुखों का रहस्य (Shadanana)

Lord Kartikeya History में अक्सर उन्हें ‘षडानन’ (छह मुखों वाले) के रूप में दर्शाया जाता है। इन छह मुखों का केवल भौतिक अर्थ नहीं है, बल्कि इसके पीछे गहरा आध्यात्मिक और दार्शनिक रहस्य छिपा है।

उनके 6 मुख मानव जीवन की 6 प्रमुख बुराइयों या शत्रुओं (षड्रिपु) पर विजय का प्रतीक हैं:

  1. काम (Desire): इच्छाओं पर नियंत्रण।
  2. क्रोध (Anger): गुस्से पर काबू।
  3. लोभ (Greed): लालच से मुक्ति।
  4. मोह (Attachment): सांसारिक लगाव से दूरी।
  5. मद (Pride): अहंकार का नाश।
  6. मात्सर्य (Jealousy): ईर्ष्या से परे होना।

इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि उनके 6 मुख छह दिशाओं (पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, आकाश और पाताल) में देखने और ब्रह्मांड की रक्षा करने की उनकी क्षमता को दर्शाते हैं। जो भी भक्त सच्चे मन से मुरुगन स्वामी की पूजा करता है, उसे इन छह बुराइयों से मुक्ति मिलती है।

Lord Kartikeya

6. भगवान कार्तिकेय का वाहन: मोर (Peacock)

Lord Kartikeya History में उनके वाहन का भी अपना एक अलग इतिहास है। उनका वाहन मोर है, जिसे ‘परावणी’ कहा जाता है।

कथाओं के अनुसार, जब कार्तिकेय ने तारकासुर के भाई शूरपद्मन से युद्ध किया था, तो शूरपद्मन ने एक विशाल पेड़ का रूप धारण कर लिया था। कार्तिकेय ने अपने ‘वेल’ (भाले) से उस पेड़ को दो हिस्सों में चीर दिया।

उस पेड़ का एक हिस्सा मोर बन गया, जिसे कार्तिकेय ने अपना वाहन बना लिया, और दूसरा हिस्सा मुर्गा (Rooster) बन गया, जिसे उन्होंने अपने ध्वज (झंडे) का प्रतीक बना लिया। मोर सौंदर्य और पवित्रता का प्रतीक है, जो यह भी दर्शाता है कि भगवान कार्तिकेय ने अपने अहंकार और बुराइयों को अपने पैरों तले दबा रखा है।

7. कार्तिकेय भगवान के प्रमुख मंदिर (Arupadaiveedu)

अगर आप Lord Kartikeya History को करीब से महसूस करना चाहते हैं, तो दक्षिण भारत में स्थित उनके छह प्रमुख मंदिरों की यात्रा करनी चाहिए। इन छह मंदिरों को संयुक्त रूप से ‘अरुपदईवेडु’ (Arupadaiveedu) कहा जाता है। ये मंदिर तमिलनाडु में स्थित हैं और भगवान मुरुगन के जीवन की विभिन्न घटनाओं को दर्शाते हैं:

  1. पलानी (Palani): यह वही स्थान है जहाँ ज्ञान फल न मिलने पर कार्तिकेय क्रोधित होकर एक संन्यासी (दंडायुथपानी) के रूप में आकर रुके थे।
  2. थिरुचेंदुर (Thiruchendur): यहाँ भगवान कार्तिकेय ने शूरपद्मन नामक राक्षस का वध किया था। यह एकमात्र मंदिर है जो समुद्र के किनारे स्थित है।
  3. स्वामीमलाई (Swamimalai): इस स्थान पर बालक कार्तिकेय ने अपने पिता भगवान शिव को ‘प्रणव मंत्र’ (ॐ) का अर्थ समझाया था। यहाँ पुत्र ने पिता को गुरु बनकर शिक्षा दी थी।
  4. थिरुप्परनकुंद्रम (Thirupparankundram): यहाँ भगवान कार्तिकेय का विवाह देवराज इंद्र की पुत्री देवसेना के साथ हुआ था।
  5. थिरुथानी (Thiruthani): युद्ध के बाद भगवान कार्तिकेय ने यहाँ विश्राम किया था और उनका क्रोध यहाँ शांत हुआ था।
  6. पझमुदिरचोलाई (Pazhamudircholai): यहाँ मुरुगन स्वामी अपनी दोनों पत्नियों (वल्ली और देवसेना) के साथ विराजते हैं।

उत्तर भारत में भी हरियाणा के पिहोवा (कुरुक्षेत्र) में कार्तिकेय जी का एक प्राचीन और सिद्ध मंदिर है, लेकिन वहाँ महिलाओं का प्रवेश वर्जित माना जाता है, क्योंकि यहाँ कार्तिकेय जी ब्रह्मचारी रूप में पूजे जाते हैं।

“Astonishing Ganesh History: श्री गणेश जी का इतिहास: 9 रहस्यमय कथाएं और अवतार” 2026

निष्कर्ष: Lord Kartikeya History से हमें क्या सीख मिलती है?

Lord Kartikeya History सिर्फ एक पौराणिक कथा नहीं है, बल्कि यह साहस, ज्ञान और न्याय की विजय का प्रतीक है। भगवान कार्तिकेय हमें सिखाते हैं कि:

  • ज्ञान और बल का संतुलन: केवल ताकत ही नहीं, बल्कि ज्ञान (‘वेल’ जिसका प्रतीक है) भी जीवन में सफल होने के लिए आवश्यक है।
  • अहंकार का त्याग: फल न मिलने पर उनका राजसी सुख छोड़कर संन्यासी बन जाना, सांसारिक मोहमाया के त्याग को दर्शाता है।
  • बुराइयों पर विजय: उनके छह मुख हमें अपने अंदर के छह शत्रुओं (काम, क्रोध, लोभ आदि) को हराने की प्रेरणा देते हैं।

दक्षिण भारत में ‘मुरुगन’ के रूप में उनकी आराधना यह साबित करती है कि ईश्वर का स्वरूप हर जगह एक ही है, बस उन्हें पुकारने के नाम अलग हैं। उम्मीद है कि Lord Kartikeya History पर आधारित यह विस्तृत जानकारी आपको पसंद आई होगी। भगवान कार्तिकेय की कृपा आप और आपके परिवार पर हमेशा बनी रहे।

Lord Kartikeya

हर हर महादेव! वेत्री वेल मुरुगनकु अरोहरा!

 

https://youtu.be/jPgcdXjmszY

Divya Sur

Tags: Hindu Mythology.Kartikeya Janam KathaLord Kartikeya HistoryLord MuruganSkanda PuranaStory of Kartikeya in Hindiभगवान कार्तिकेय का इतिहासमुरुगन स्वामी
Divya Sur

Divya Sur

Pages

  • About Us
  • Contact Us
  • Disclaimer
  • Privacy Policy
  • Terms & Conditions
  • About
  • Privacy & Policy
  • Contact
  • Disclaimer
  • Terms & Conditions

© 2026 Divya Sur. All Rights Reserved.

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In

Add New Playlist

No Result
View All Result
  • Hanuman
  • Mata
  • Shiv
  • Radha Krishna
  • Radha Krishna
  • Khatu Shyam
  • Sawariya Seth

© 2026 Divya Sur. All Rights Reserved.