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“51 Shaktipeethon Mein Sabse Adbhut: Hinglaj Mata Ka Asli Rahasya aur Itihaas” 2026

"जानिए 51 शक्तिपीठों में से एक Hinglaj Mata का असली इतिहास, रहस्य और चमत्कार। पाकिस्तान के बलूचिस्तान में स्थित इस मंदिर की पूरी जानकारी हिंदी में।"

by Divya Sur
June 17, 2026
in Mata
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Hinglaj Mata
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51 Shaktipeethon Mein Sabse Adbhut: Hinglaj Mata Ka Asli Rahasya aur Itihaas

हिंदू धर्म में शक्तिपीठों का एक विशेष और अत्यंत पवित्र स्थान है। जब भी हम देवी सती के पावन शक्तिपीठों की बात करते हैं, तो 51 शक्तिपीठों का नाम सबसे पहले आता है। इन सभी पीठों में से एक ऐसा शक्तिपीठ है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति, कठिन यात्रा और चमत्कारों के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है। हम बात कर रहे हैं Hinglaj Mata की।

आज के समय में Hinglaj Mata का मंदिर भारत की सीमाओं से पार, पड़ोसी देश पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। यह केवल एक मंदिर नहीं है, बल्कि यह हिंदू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों की आस्था का एक अद्भुत संगम है। इस विस्तृत लेख में हम Hinglaj Mata के असली इतिहास, पौराणिक कथाओं, यहां तक पहुंचने की दुर्गम यात्रा और इसके पीछे छिपे उन सभी रहस्यों के बारे में विस्तार से जानेंगे जो हर सनातन प्रेमी को जानने चाहिए।

 

1. Hinglaj Mata का पौराणिक इतिहास और उत्पत्ति

भारतीय धर्मग्रंथों और पुराणों के अनुसार, Hinglaj Mata का इतिहास माता सती के आत्मदाह की कथा से जुड़ा हुआ है। शिव पुराण और देवी भागवत पुराण में इस कथा का बहुत ही मार्मिक और विस्तृत वर्णन मिलता है।

प्रजापति दक्ष का यज्ञ और माता सती का आत्मदाह

कथा के अनुसार, माता सती के पिता प्रजापति दक्ष ने एक विशाल ‘कनखल यज्ञ’ का आयोजन किया था। इस यज्ञ में उन्होंने ब्रह्मांड के सभी देवी-देवताओं, ऋषि-मुनियों और यक्ष-गंधर्वों को आमंत्रित किया, लेकिन अपने ही दामाद भगवान शिव और पुत्री सती को निमंत्रण नहीं दिया। माता सती अपने पिता के इस आयोजन में बिना बुलाए ही चली गईं।

वहां पहुंचने पर प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव का घोर अपमान किया। अपने पति का अपमान माता सती से सहन नहीं हुआ और उन्होंने उसी यज्ञ कुंड की अग्नि में कूदकर अपने प्राणों की आहुति दे दी। जब भगवान शिव को इस घटना का पता चला, तो उनका क्रोध सातवें आसमान पर पहुंच गया। उन्होंने वीरभद्र को उत्पन्न कर दक्ष का यज्ञ विध्वंस कर दिया और माता सती के जले हुए शरीर को अपने कंधों पर उठाकर पूरे ब्रह्मांड में तांडव करने लगे।

सुदर्शन चक्र और शक्तिपीठों का निर्माण

भगवान शिव के क्रोध और तांडव से पूरी सृष्टि में हाहाकार मच गया। ब्रह्मांड को विनाश से बचाने के लिए भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र का प्रयोग किया और माता सती के पार्थिव शरीर के 51 टुकड़े कर दिए। पृथ्वी पर जहां-जहां माता सती के अंग और आभूषण गिरे, वहां-वहां ‘शक्तिपीठ’ की स्थापना हुई।

पुराणों के अनुसार, पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में माता सती का “ब्रह्मरंध्र” (सिर का ऊपरी भाग) गिरा था। इसी पवित्र स्थान को आज हम Hinglaj Mata के शक्तिपीठ के रूप में पूजते हैं। इस पीठ की भैरव ‘भीमलोचन’ हैं और देवी को ‘कोट्टरी’ (Brahmarandhra) के नाम से जाना जाता है।

2. Hinglaj Mata मंदिर की भौगोलिक स्थिति

Hinglaj Mata का मंदिर पाकिस्तान के सबसे बड़े और अशांत प्रांत बलूचिस्तान के लसबेला जिले (Lasbela District) में स्थित है। यह स्थान मकरान तटीय राजमार्ग (Makran Coastal Highway) के पास, हिंगोल राष्ट्रीय उद्यान (Hingol National Park) के मध्य में है।

कराची से इस मंदिर की दूरी लगभग 250 किलोमीटर है। यह मंदिर किसी भव्य इमारत में नहीं, बल्कि ‘हिंगोल नदी’ (Hingol River) के किनारे अरावली और खीर्थर पर्वतमाला (Kirthar Mountains) की एक संकरी और अंधेरी गुफा के अंदर स्थित है। इस गुफा में माता की कोई मानव निर्मित मूर्ति नहीं है, बल्कि एक गोल आकार की प्राकृतिक शिला (सिंदूर से पुती हुई पिंडी) की पूजा की जाती है, जिसे देवी का स्वरूप माना जाता है।

Hinglaj Mata

3. Hinglaj Mata यात्रा: एक दुर्गम और साहसिक तीर्थ

अगर हम हिंदू धर्म की सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं की बात करें, तो अमरनाथ यात्रा और कैलाश मानसरोवर यात्रा के बाद Hinglaj Mata की यात्रा का नाम आता है। एक समय था जब यह यात्रा मरुस्थल (Desert), जंगली जानवरों, डाकुओं और पानी की कमी के कारण जानलेवा मानी जाती थी।

यात्रा के मुख्य पड़ाव

Hinglaj Mata की पारंपरिक यात्रा कराची से शुरू होती है। पुराने समय में तीर्थयात्री पैदल या ऊंटों के जरिए यह यात्रा करते थे, जिसमें महीनों लग जाते थे। आज मकरान कोस्टल हाईवे बनने के कारण यात्रा थोड़ी आसान हो गई है, लेकिन धार्मिक विधान आज भी पुराने ही हैं।

  1. कराची से प्रस्थान: यात्रा कराची के स्वामी नारायण मंदिर से छड़ी मुबारक (एक पवित्र ध्वज) के साथ शुरू होती है।
  2. चंद्रकूप (Chandragup Mud Volcano): यह यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण और रहस्यमयी पड़ाव है। चंद्रकूप एक जीवित ‘मड वोल्केनो’ (मिट्टी का ज्वालामुखी) है। Hinglaj Mata के दर्शन करने से पहले हर तीर्थयात्री को इस ज्वालामुखी के दर्शन करने होते हैं।
    • रहस्य: ऐसा माना जाता है कि चंद्रकूप के पास जाकर तीर्थयात्री अपने पापों को स्वीकार करते हैं। जो व्यक्ति सच्चे मन से अपने पाप नहीं मानता, कहते हैं कि ज्वालामुखी से मिट्टी का उबाल आना बंद हो जाता है। पाप स्वीकार करने के बाद, यात्री ज्वालामुखी में नारियल और प्रसाद चढ़ाते हैं।
  3. अघोर नदी (Aghor River): चंद्रकूप के बाद यात्री अघोर नदी (जिसे हिंगोल नदी भी कहते हैं) में पवित्र स्नान करते हैं। यह नदी पहाड़ों के बीच से बहती है और इसी के किनारे Hinglaj Mata की गुफा है।
  4. गुफा प्रवेश: अंत में, भक्त पहाड़ों की सीढ़ियां चढ़कर उस अंधेरी गुफा में पहुंचते हैं जहां Hinglaj Mata साक्षात विराजमान हैं।

4. ‘नानी मंदिर’ : हिंदू-मुस्लिम एकता का अनूठा प्रतीक

Hinglaj Mata की सबसे खास और हैरान करने वाली बात यह है कि यह स्थान केवल हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि बलूचिस्तान के स्थानीय मुसलमानों के लिए भी उतना ही पवित्र है। बलूचिस्तान के ‘ज़िक्री’ (Zikri) समुदाय के मुस्लिम इस मंदिर को “नानी का मंदिर” (Nani Mandir) या “बीबी नानी का मकबरा” (Bibi Nani) कहते हैं।

नानी हज (Nani Haj)

स्थानीय बलूच मुस्लिम देवी को एक सूफी संत या चमत्कारिक पीर के रूप में मानते हैं। वे हर साल यहां आते हैं और अपनी इस यात्रा को “नानी का हज” (Nani Haj) कहते हैं। वे देवी को लाल चुनरी चढ़ाते हैं, मन्नत का धागा बांधते हैं और शीरीनी (मीठा प्रसाद) बांटते हैं।

पाकिस्तान जैसे इस्लामी देश में, जहां कई हिंदू मंदिरों को तोड़ा गया या वे जर्जर हालत में हैं, Hinglaj Mata का मंदिर आज भी पूरी तरह से सुरक्षित है। इसका सबसे बड़ा कारण यही है कि स्थानीय बलूच मुसलमान स्वयं इस मंदिर की रक्षा करते हैं और इसे अपनी संस्कृति का हिस्सा मानते हैं। यहां हिंदू ‘भजन’ गाते हैं तो मुस्लिम शांति से अपना ‘ज़िक्र’ करते हैं। यह स्थान दुनिया के लिए सांप्रदायिक सौहार्द की एक बहुत बड़ी मिसाल है।

Hinglaj Mata

5. भगवान राम और परशुराम से जुड़ा इतिहास

Hinglaj Mata के दरबार का महत्व त्रेता युग से ही चला आ रहा है। कई प्राचीन ग्रंथों और स्थानीय किंवदंतियों में इस बात का जिक्र है कि भगवान विष्णु के अवतार भी इस शक्तिपीठ में शीश नवाने आ चुके हैं।

  • भगवान परशुराम की कथा: जब भगवान परशुराम ने पृथ्वी से 21 बार क्षत्रियों का विनाश किया था, तो कुछ क्षत्रिय अपनी जान बचाकर Hinglaj Mata की शरण में पहुंच गए थे। माता ने उन्हें अभय दान दिया और परशुराम जी के क्रोध से उन्हें बचाया। इन्हीं क्षत्रियों के वंशज आज ‘खत्री’ और ‘ब्रह्मक्षत्रिय’ कहलाते हैं, जिनकी कुलदेवी आज भी हिंगलाज भवानी हैं।
  • भगवान राम की यात्रा: एक लोककथा के अनुसार, रावण (जो कि एक ब्राह्मण था) का वध करने के बाद भगवान श्री राम पर ‘ब्रह्महत्या’ का पाप लग गया था। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए गुरु वशिष्ठ की सलाह पर भगवान राम ने सीता माता और लक्ष्मण जी के साथ Hinglaj Mata की पैदल यात्रा की थी। उन्होंने चंद्रकूप पर अपने पापों का प्रायश्चित किया और माता के दर्शन कर ब्रह्महत्या के पाप से मुक्त हुए थे।
  • गुरु नानक देव जी: सिख धर्म के संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी की उदासियों (यात्राओं) के दौरान, उनके मक्का और मदीना जाते समय Hinglaj Mata के दरबार में रुकने का भी उल्लेख मिलता है।
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6. Hinglaj Mata के चमत्कार और रहस्य

भारत के राजस्थान, गुजरात और मध्य प्रदेश के लोगों में Hinglaj Mata के प्रति अगाध श्रद्धा है। यहां के स्थानीय लोगों और दर्शनार्थियों द्वारा कई चमत्कारों का वर्णन किया जाता है:

  1. चमत्कारी ज्योति: गुफा के अंदर बिना किसी घी या तेल के प्राकृतिक रूप से एक अखंड ज्योति सदियों से प्रज्वलित है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह भूगर्भिक गैसों के कारण हो सकता है, लेकिन भक्तों के लिए यह माता का साक्षात चमत्कार है।
  2. बीमारियों का इलाज: हिंगोल नदी के पानी और चंद्रकूप ज्वालामुखी की मिट्टी को अत्यंत पवित्र माना जाता है। मान्यता है कि चंद्रकूप की मिट्टी का लेप शरीर पर लगाने से गंभीर चर्म रोग (Skin Diseases) और कुष्ठ रोग ठीक हो जाते हैं।
  3. मनोकामना पूर्ति का रहस्य: ऐसा कहा जाता है कि जो भी व्यक्ति जीवन में एक बार Hinglaj Mata के दर्शन कर लेता है, उसे नरक की यातनाएं नहीं सहनी पड़तीं। जो भक्त सच्चे मन से माता के दरबार में लाल चुनरी और नारियल चढ़ाकर मन्नत मांगता है, वह कभी खाली हाथ नहीं लौटता।
  4. अघोरियों की सिद्ध भूमि: हिंगलाज को तंत्र साधना का एक प्रमुख केंद्र भी माना जाता है। भारत और नेपाल से कई अघोरी और तांत्रिक गुप्त रूप से शक्तियां प्राप्त करने के लिए यहां आते रहे हैं। तंत्र शास्त्र के ‘हिंगलाज तंत्र’ में इस स्थान की अपार ऊर्जा का वर्णन किया गया है।
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7. भारतीय श्रद्धालुओं के लिए Hinglaj Mata जाने के नियम

आज के समय में भू-राजनीतिक (Geopolitical) कारणों से भारत से पाकिस्तान जाकर Hinglaj Mata के दर्शन करना एक बहुत ही मुश्किल काम है, लेकिन यह असंभव नहीं है।

वीज़ा और प्रक्रिया (Visa and Process)

भारतीय नागरिक अगर Hinglaj Mata के दर्शन करना चाहते हैं, तो उन्हें पाकिस्तान का ‘तीर्थयात्रा वीज़ा’ (Pilgrim Visa) लेना पड़ता है।

  • यह वीज़ा सामान्य तौर पर भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच हुए प्रोटोकॉल के तहत ‘जत्थों’ (समूहों) को दिया जाता है।
  • वीज़ा प्राप्त करने के लिए दिल्ली स्थित पाकिस्तान उच्चायोग में आवेदन करना होता है।
  • स्थानीय स्पांसर (Sponsor) या पाकिस्तान हिंदू काउंसिल का निमंत्रण पत्र होने पर वीज़ा मिलने में आसानी होती है।

राजस्थान और गुजरात में हिंगलाज मंदिर

चूंकि हर भारतीय के लिए बलूचिस्तान जाना संभव नहीं है, इसलिए भारत में भी Hinglaj Mata के कई भव्य मंदिर बनाए गए हैं। राजस्थान के बाड़मेर और जैसलमेर, तथा गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में माता के कई मंदिर हैं, जहां भक्त अपनी श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में भी हिंगलाज माता का एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर है, जिसे ‘मिनी हिंगलाज’ कहा जाता है।

8. Hinglaj Mata और चारण/राजपूत समाज

राजस्थान और गुजरात के राजपूत, चारण, खत्री और भानुशाली समाज के लिए Hinglaj Mata का स्थान सर्वोपरि है। वे माता को अपनी ‘कुलदेवी’ (Family Deity) मानते हैं।

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि सिंध और राजस्थान के शूरवीर युद्ध में जाने से पहले माता का जयकारा लगाते थे। ऐसा माना जाता है कि माता रानी की कृपा से ही वीर योद्धाओं को युद्ध के मैदान में विजय और वीरता प्राप्त होती थी। ‘जय हिंगलाज’ का उद्घोष आज भी इन समाजों में एक दूसरे से अभिवादन करते समय किया जाता है।

Hinglaj Mata

9. भविष्य की चुनौतियां और संरक्षण की आवश्यकता

वर्तमान में Hinglaj Mata का मंदिर जिस क्षेत्र में है, वहां बुनियादी सुविधाओं का बहुत अभाव है। यद्यपि पाकिस्तान सरकार और बलूचिस्तान प्रशासन ने मकरान तटीय राजमार्ग बनाकर परिवहन को आसान किया है, लेकिन फिर भी श्रद्धालुओं के रुकने, पीने के साफ पानी और चिकित्सा की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

हर साल अप्रैल के महीने में यहां बहुत बड़ा मेला लगता है, जिसमें पाकिस्तान के सिंध और बलूचिस्तान प्रांत से लाखों हिंदू (और ज़िक्री मुस्लिम) हिस्सा लेते हैं। इस मेले के दौरान भीड़ का प्रबंधन और पर्यावरण की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती बन जाती है। हिंगोल नेशनल पार्क का पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) बहुत ही नाजुक है, इसलिए इस पवित्र स्थान को ‘इको-टूरिज्म’ के तहत संरक्षित करने की सख्त जरूरत है।

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10. निष्कर्ष (Conclusion)

Hinglaj Mata का यह शक्तिपीठ केवल एक मंदिर या एक भौगोलिक स्थान नहीं है। यह आस्था का वह अटूट विश्वास है जो सीमाओं, धर्मों और राजनीतिक दूरियों को मिटा देता है। एक तरफ जहां यह सती के बलिदान और शिव के प्रेम का प्रतीक है, वहीं दूसरी तरफ यह बलूच मुसलमानों की ‘नानी’ के रूप में सांप्रदायिक एकता का एक जीवंत उदाहरण है।

जब भी 51 शक्तिपीठों का जिक्र होगा, तो सबसे कठिन, सबसे रहस्यमयी और सबसे अद्भुत पीठ के रूप में Hinglaj Mata का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। माता हिंगलाज का यह मंदिर हमें यह सिखाता है कि सच्ची श्रद्धा के लिए कोई भी मरुस्थल बड़ा नहीं होता और कोई भी सरहद आस्था को बांध नहीं सकती। जो कोई भी सच्चे मन से “जय माता दी” कहकर Hinglaj Mata का स्मरण करता है, माता रानी उसकी सभी विपत्तियों को दूर कर देती हैं।

11. Frequently Asked Questions (FAQs) About Hinglaj Mata

Q1. Hinglaj Mata का मंदिर कहाँ स्थित है?

Ans. यह मंदिर पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में लसबेला जिले में, हिंगोल नदी के तट पर हिंगोल नेशनल पार्क की एक गुफा में स्थित है।

Q2. हिंगलाज माता के मंदिर को पाकिस्तान में मुसलमान क्या कहते हैं?

Ans. बलूचिस्तान के स्थानीय मुस्लिम (ज़िक्री समुदाय) हिंगलाज माता को ‘नानी पीर’ या ‘बीबी नानी’ के नाम से पूजते हैं और इस मंदिर को ‘नानी मंदिर’ कहते हैं।

Q3. क्या भारतीय हिंगलाज माता मंदिर जा सकते हैं?

Ans. हाँ, भारतीय जा सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें पाकिस्तानी दूतावास से विशेष ‘तीर्थयात्रा वीज़ा’ (Pilgrim Visa) प्राप्त करना होता है। यह एक जटिल प्रक्रिया है और आमतौर पर जत्थों (Groups) को ही वीज़ा दिया जाता है।

Q4. 51 शक्तिपीठों में हिंगलाज माता का क्या महत्व है?

Ans. हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, यहाँ माता सती का ‘ब्रह्मरंध्र’ (सिर का ऊपरी हिस्सा) गिरा था। इसलिए इसे 51 शक्तिपीठों में अत्यंत प्रमुख और प्रथम शक्तिपीठों में से एक माना जाता है।

Q5. चंद्रकूप क्या है और इसका हिंगलाज यात्रा से क्या संबंध है?

Ans. चंद्रकूप (Chandragup) बलूचिस्तान में स्थित एक सक्रिय ‘मड वोल्केनो’ (मिट्टी का ज्वालामुखी) है। हिंगलाज माता के दर्शन से पहले तीर्थयात्रियों को यहाँ जाकर अपने पाप स्वीकार करने होते हैं। इसे यात्रा का सबसे पवित्र नियम माना जाता है।

Q6. भारत में हिंगलाज माता का मंदिर कहाँ है?

Ans. जो श्रद्धालु पाकिस्तान नहीं जा पाते, वे भारत में स्थित माता के मंदिरों के दर्शन करते हैं। मध्य प्रदेश (छिंदवाड़ा), राजस्थान (बाड़मेर, जैसलमेर), और गुजरात में हिंगलाज माता के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर स्थापित हैं।

https://youtu.be/dnRBiAzF8rE

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