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BHIMASHANKAR JYOTIRLING: 10 अद्भुत रहस्य: BHIMASHANKAR JYOTIRLING का प्राचीन इतिहास 2026

जानिए महाराष्ट्र के पुणे में स्थित BHIMASHANKAR JYOTIRLING के प्राचीन इतिहास, पौराणिक कथाओं, वास्तुकला और दर्शन से जुड़ी 10 अद्भुत बातें।

by Divya Sur
June 19, 2026
in Shiv
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BHIMASHANKAR JYOTIRLING
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10 अद्भुत रहस्य: BHIMASHANKAR JYOTIRLING का प्राचीन और पवित्र इतिहास

भारत भूमि को देवताओं की भूमि कहा जाता है, जहाँ कण-कण में भगवान शिव का वास माना जाता है। इसी पवित्र भूमि पर स्थित हैं बारह ज्योतिर्लिंग, जिनमें से एक है महाराष्ट्र के पुणे जिले में स्थित BHIMASHANKAR JYOTIRLING। सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाओं की हरियाली के बीच स्थित यह ज्योतिर्लिंग न केवल धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, बल्कि यहाँ की प्राकृतिक छटा भी मन को मोह लेने वाली है।

आज हम इस लेख में BHIMASHANKAR JYOTIRLING के उस रहस्यमयी और प्राचीन इतिहास के पन्नों को पलटेंगे, जिनके बारे में शायद ही कोई जानता हो।

BHIMASHANKAR JYOTIRLING

BHIMASHANKAR JYOTIRLING: एक दिव्य परिचय

BHIMASHANKAR JYOTIRLING को भगवान शिव के छठे ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। यह पवित्र स्थान पुणे से लगभग 110 किलोमीटर दूर खेड़ तालुका में भोरगिरी गाँव के पास स्थित है। ऐसा माना जाता है कि इसी स्थान से भीमा नदी का उद्गम होता है, जो आगे चलकर कृष्णा नदी में मिल जाती है।

यहाँ भगवान शिव को ‘भीमेश्वर’ के रूप में पूजा जाता है। यह ज्योतिर्लिंग ‘मोटेश्वर महादेव’ के नाम से भी प्रसिद्ध है क्योंकि यहाँ शिवलिंग काफी मोटा और विशाल है।

BHIMASHANKAR JYOTIRLING का इतिहास और पौराणिक कथाएँ

इस ज्योतिर्लिंग से जुड़ी कई पौराणिक कथाएँ और रहस्य हैं, जो इसे अन्य ज्योतिर्लिंगों से अलग बनाते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे की मुख्य कहानियों को।

त्रिपुरासुर वध की कथा

शिव पुराण के अनुसार, एक बार त्रिपुरासुर नामक एक भयंकर राक्षस ने अपनी घोर तपस्या से ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया और अमरता का वरदान प्राप्त कर लिया। इस वरदान के बल पर उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया। सभी देवता त्राहि-त्राहि करने लगे और भगवान शिव के पास पहुँचे।

देवताओं की पुकार सुनकर भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करने का निश्चय किया। शिव जी ने अपनी तीसरी आँख खोली और उस राक्षस को भस्म कर दिया। युद्ध के बाद, जब भगवान शिव ने विश्राम किया, तो उनके शरीर से पसीने की बूँदें जमीन पर गिरीं। ऐसा माना जाता है कि उन्हीं बूँदों से एक पवित्र नदी का निर्माण हुआ, जिसे आज ‘भीमा’ नदी के नाम से जाना जाता है।

BHIMASHANKAR JYOTIRLING

कुंभकर्ण के पुत्र भीम की कथा

BHIMASHANKAR JYOTIRLING से जुड़ी एक और कथा बहुत प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है कि रावण के भाई कुंभकर्ण का एक पुत्र था, जिसका नाम भीम था। उसका जन्म कुंभकर्ण की मृत्यु के बाद हुआ था। जब भीम को अपने पिता की मृत्यु का कारण पता चला, तो उसने देवताओं से बदला लेने की ठान ली।

भीम ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या की और असीम शक्तियाँ प्राप्त कर लीं। शक्तियों के घमंड में उसने स्वर्ग पर आक्रमण कर दिया और देवताओं को बंदी बना लिया। उसने एक परम शिव भक्त राजा सुदक्षिण को भी बंदी बना लिया।

भगवान शिव का प्रकट होना

बंदीगृह में भी राजा सुदक्षिण भगवान शिव की आराधना करते रहे। उन्होंने मिट्टी का एक शिवलिंग बनाया और उसकी पूजा शुरू कर दी। जब भीम को इस बात का पता चला, तो उसने क्रोध में आकर उस शिवलिंग पर अपनी तलवार से प्रहार किया।

उसी क्षण, शिवलिंग से स्वयं भगवान शिव प्रकट हुए और भीम के साथ उनका भयंकर युद्ध हुआ। अंततः, भगवान शिव ने अपनी एक हुंकार से ही भीम और उसके राक्षसों को भस्म कर दिया। युद्ध के बाद, देवताओं और ऋषियों ने भगवान शिव से प्रार्थना की कि वे हमेशा के लिए इसी स्थान पर विराजमान हों। देवताओं की इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए, भगवान शिव वहीं BHIMASHANKAR JYOTIRLING के रूप में स्थापित हो गए।

BHIMASHANKAR JYOTIRLING मंदिर की वास्तुकला

यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है।

नागर और इंडो-आर्यन शैली का मिश्रण

BHIMASHANKAR JYOTIRLING मंदिर की वास्तुकला नागर और इंडो-आर्यन शैली का एक सुंदर मिश्रण है। मंदिर के खंभों पर की गई बारीक नक्काशी और मूर्तियाँ इसकी प्राचीनता और कलात्मकता को दर्शाती हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण कई चरणों में हुआ था। इसके कुछ हिस्से 13वीं शताब्दी के हैं, जबकि शिखर और अन्य हिस्सों का निर्माण 18वीं शताब्दी में नाना फड़नवीस द्वारा करवाया गया था।

BHIMASHANKAR JYOTIRLING

मंदिर का परिसर

मंदिर परिसर में एक विशाल प्रांगण है, जहाँ श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए एकत्रित होते हैं। मंदिर के गर्भगृह में मुख्य ज्योतिर्लिंग स्थापित है, जहाँ हर समय पूजा-अर्चना होती रहती है। मंदिर के बाहर एक विशाल नंदी की मूर्ति भी स्थापित है।

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BHIMASHANKAR JYOTIRLING के आसपास के दर्शनीय स्थल

BHIMASHANKAR JYOTIRLING के दर्शन के अलावा, आप इसके आसपास के कुछ अन्य दर्शनीय स्थलों का भी भ्रमण कर सकते हैं:

1. भीमाशंकर वन्यजीव अभयारण्य

यह अभयारण्य पश्चिमी घाट के घने जंगलों में फैला हुआ है। यह मुख्य रूप से ‘भारतीय विशाल गिलहरी’ (Indian Giant Squirrel) के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा, यहाँ कई प्रकार के पक्षी, जानवर और वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। प्रकृति प्रेमियों के लिए यह एक स्वर्ग है।

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2. हनुमान झील

यह मंदिर से कुछ ही दूरी पर स्थित एक सुंदर और शांत झील है। बारिश के मौसम में यहाँ का दृश्य बहुत मनोरम होता है। लोग यहाँ पिकनिक मनाने और सुकून के पल बिताने आते हैं।

3. गुप्त भीमाशंकर

यह वह स्थान है जहाँ से भीमा नदी का उद्गम माना जाता है। यह मंदिर से थोड़ी दूर जंगल में स्थित है। यहाँ तक पहुँचने के लिए थोड़ी ट्रैकिंग करनी पड़ती है।

4. नागफनी पॉइंट

यह भीमाशंकर का सबसे ऊँचा स्थान है। यहाँ से आसपास की पहाड़ियों और जंगलों का अद्भुत नजारा दिखाई देता है। यह जगह फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए बहुत अच्छी है।

BHIMASHANKAR JYOTIRLING कैसे पहुँचें?

यहाँ पहुँचना काफी आसान है। आप देश के किसी भी हिस्से से यहाँ आसानी से पहुँच सकते हैं।

हवाई मार्ग द्वारा

सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पुणे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 110 किलोमीटर दूर है। हवाई अड्डे से आप टैक्सी या बस लेकर आसानी से मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

रेल मार्ग द्वारा

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुणे जंक्शन है। यहाँ से देश के प्रमुख शहरों के लिए ट्रेनें उपलब्ध हैं। रेलवे स्टेशन से भी आपको मंदिर तक जाने के लिए टैक्सी और बसें मिल जाएँगी।

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सड़क मार्ग द्वारा

BHIMASHANKAR JYOTIRLING सड़क मार्ग द्वारा महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों जैसे पुणे, मुंबई, नासिक आदि से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। महाराष्ट्र राज्य परिवहन की बसें नियमित रूप से यहाँ के लिए चलती हैं। आप अपनी निजी कार या टैक्सी से भी यहाँ पहुँच सकते हैं।

दर्शन का समय और पूजा के नियम

  • मंदिर खुलने का समय: सुबह 4:30 बजे
  • आरती का समय: सुबह 5:00 बजे (काकड़ आरती), दोपहर 12:00 बजे (मध्याह्न आरती), शाम 7:30 बजे (संध्या आरती)
  • मंदिर बंद होने का समय: रात 9:30 बजे

नोट: त्योहारों और विशेष अवसरों पर दर्शन के समय में बदलाव हो सकता है।

यहाँ अभिषेक और अन्य पूजाओं के लिए अलग-अलग नियम हैं। महाशिवरात्रि और श्रावण मास के दौरान यहाँ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. BHIMASHANKAR JYOTIRLING कहाँ स्थित है?

यह ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र के पुणे जिले में खेड़ तालुका के भोरगिरी गाँव के पास स्थित है।

2. BHIMASHANKAR JYOTIRLING की क्या मान्यता है?

यह भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। माना जाता है कि यहाँ भगवान शिव ने भीम नामक राक्षस का वध किया था।

3. यहाँ दर्शन करने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?

यहाँ आने का सबसे अच्छा समय अगस्त से फरवरी के बीच होता है। बारिश के मौसम में यहाँ का प्राकृतिक सौंदर्य और भी निखर जाता है।

4. क्या मैं BHIMASHANKAR JYOTIRLING में रुद्राभिषेक कर सकता हूँ?

हाँ, यहाँ श्रद्धालु रुद्राभिषेक और अन्य पूजा-अर्चना कर सकते हैं। इसके लिए मंदिर समिति द्वारा रसीद कटवानी होती है।

5. क्या मंदिर के आसपास ठहरने की सुविधा है?

हाँ, मंदिर के आसपास कई छोटे-बड़े होटल, लॉज और धर्मशालाएँ उपलब्ध हैं।

6. भीमाशंकर से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन कौन सा है?

सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन पुणे जंक्शन है, जो लगभग 110 किमी दूर है।

7. क्या भीमाशंकर ट्रेकिंग के लिए अच्छा है?

हाँ, भीमाशंकर के आसपास कई अच्छे ट्रेकिंग रूट्स हैं, जो प्रकृति प्रेमियों और रोमांच पसंद लोगों को बहुत पसंद आते हैं।

8. भीमाशंकर मंदिर की वास्तुकला किस शैली की है?

मंदिर की वास्तुकला मुख्य रूप से नागर और इंडो-आर्यन शैली का मिश्रण है।

9. क्या भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा है?

हाँ, कुछ विशेष पूजाओं और दर्शन के लिए ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध हो सकती है, इसके लिए आधिकारिक वेबसाइट की जाँच करना उचित रहेगा।

10. ‘मोटेश्वर महादेव’ किसे कहा जाता है?

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग को ही ‘मोटेश्वर महादेव’ कहा जाता है क्योंकि यहाँ का शिवलिंग काफी विशाल है।

https://youtu.be/4Ky9AAHk9b4

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Tags: 12 JyotirlingaBhima riverBhimashankar history in hindiBhimashankar templeBhimashankar trek.Lord ShivaMaharashtra tourism
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